Shayri

 

Shayri


दोस्तों आज इस पोस्ट के जरिए अपने जिदंगी और अटीट्यूड के उपर बहुत ही अच्छी अच्छी शायरी लिखा हु।
इस लिए इस पोस्ट ना नाम Shayri रखा गया है।
इस पोस्ट में आपको बहुत अच्छी आत्तिट्यूड वाला शयरिया भी बिल्कुल मुफ्त में पढ़ने को मिलेंगी। दोस्तो आशा करता हूं कि आप मेरा पुराने पोस्ट पढ़कर बहुत ही आनन्द ले रहे होंगे।

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Shayri On Life


ना पानी देंगे, ना दूध देंगे और ना ही खीर देंगे,

अगर बात आती कश्मीर की, तो लाहौर भी छीन लेंगे।



हमें फसाने के लिए उसने चक्रव्यू का ख्वाब बुना है,

हम तो दिलजले शायर ठहरे इन महफ़िलमें,

चल देखे तो सही, 

उसने कौन सा नबाब चुना है।



सच्ची थी दोस्ती हमारी पर तू खुद्दार निकला,

अतंकवादी तो यू ही बदनाम है इश्क पर, असल में तू गद्दार निकला,

सच्ची थी दोस्ती हमारी पर तू खुद्दार निकला,

अतंकवादी तो यू ही बदनाम है इश्क पर, असल में तू गद्दार निकला,

सही कहते थे लोग, मत कर ऐसा दोस्ती,

ये जमाना आज समझदार निकला,

आंख बंद कर के किया था हमने भरोसा तुम पर,

तुम तो नहीं, पर साला मेरा कुत्ता बहुत वफादार निकला।



हैंडसम तो हर कोई होता है,

वो अपने लिए स्मार्ट देखती है,

हैंडसम तो हर कोई होता है,

वो अपने लिए स्मार्ट देखती है,

औरों से कुछ अलग हो उसमे,

वो उसमे एंसी बात देखती हैं,

बनाकर कॉलेज का बहाना उसने,

मिलने के लिए मुलाकात देखती है,

किस से आजकल क्या होता है इस जमाने मे,

सबकुछ करने के लिए रात देखती है,

यार मरने का दिल मेरा भी करता है,

पर क्या करू साला मौत भी पहले हालात देखती है।



प्यार कि इस दुनिया से तू निकल कर तो देख,

बाहर दिल वाले बहुत है,

प्यार कि इस दुनिया से तू निकल कर तो देख,

बाहर दिल वाले बहुत है,

अगर मंज़िल अलग होगी तेरी और लोगो से,

तो तुझ से जलने वाले बहुत है,

पर क्या फरक पड़ता है मुझे जलने वाले से,

मुझे चाहने वाले बहुत है,

अगर तू जाना चाहती है तो बेशक जा,

गम मे मेरे यार पिलाने वाले बहुत है,

और तू क्या सोचती है मेरे मरने पर कोई नहीं आएगा,

सुन, मेरे जनाजे पर रोने वाले बहुत है।



लटका था दुपट्टा उसकी बालों पे,

चांद भी फिका पड़ जाए इतनी लाली थी गालो पे,

पीछे मुड़कर ठह रही थी कहर वो अपने चाहने वालों पे,

चिराग भी बुझ गया उसे देखकर लाली थी इतनी उजाले में।



20 जुलाई का दिन दुखो क पहाड़ टूटा है,

उस दिन तेरा भाई बहुत रोया है,

जब भी देखू तेरी फोटो आजाते है आंसू इन आंखो मे,

ये आंखे उन दिनों मे कब सोया है,

करके याद पुरानी बातों को ,

तेरे ख़यालो मे तेरा भाई खोया है,

जिसके दिल पर लगे वहीं जाने,

हमने हमारा यार बिकाश मतानी खोया है।



तुमसे प्यार इस कदर है,

मै लेटा हूं लेटा हु, अंगड़ाई तक नहीं लेता

तुमसे प्यार इस कदर है,

मै लेटा हूं लेटा हु, अंगड़ाई तक नहीं लेता,

मै मरने की अवस्था में हु तो क्या हुआ,

तेरा नाम लेता हूं मैं दवाई तक नहीं लेता।



रूठकर मुझसे मेरा औकात क्या पूछते हो,

और क्या हुआ था उस रात वो बात क्या पूछते हो,

रूठकर मुझसे मेरा औकात क्या पूछते हो,

और क्या हुआ था उस रात वो बात क्या पूछते हो,

तुमने कहा था कि जलादो आशियाना उसका तो हमने जला दिया,

अब आग लगी थी कहासे शुरुवात क्या पूछते हो।



मेरे सहर में तेरे इश्क की तयारी हो रही है,

ये इतना ठंड क्यू हैं तेरे सहर मे बारिश है क्या,

मेरे सहर में तेरे इश्क की तयारी हो रही है,

ये इतना ठंड क्यू हैं तेरे सहर मे बारिश है क्या,

या कहीं बर्फ बारी है रही है,

ये क्यू ढक रहे है लोग मुझे देखकर चेहरे अपने,

मुझसे बदबू आती है क्या,

या फिर मुझे मारने की तयारी हो रही है।



मै आइना हूं टूटकर बिखरना जानता हूं,

तू पार्लर में जा के आयि है मै घर मे सवरना जानता हूं,

मै आइना हूं टूटकर बिखरना जानता हूं,

तू पार्लर में जा के आयि है मै घर मे सवरना जानता हूं,

शहर तेरा अदालत भी तेरी सजी है, 

फैसला जो भी हो मंजूर है मुझको,

वैसे मोहब्बत मे कौन सी दफा लगता है वो भी जानता हूं



मेरा दुख, खुद की खुशियां, मेरे जख्मों पे लगाने के नमक बचाके रखेगी,

मेरा दुख, खुद की खुशियां, मेरे जख्मों पे लगाने के नमक बचाके रखेगी,

लड़की समझदार बहुत है, मेरे फोटो को लैमिनेशन करा के रखेगी,

सुना है सादगी से डरते हो आजकल,

बहुत चेहरे पर मेक अप करती हो आजकल,

ये चेहरे की दाग बखूबी याद है मुझको,

ये राज पर्दे के पीछे कबतक छुपा के रखेगी,

वो लड़की समझदार है, 

मेरे फोटो को लैमिनेशन करा के रखेगी।



मै शायर हूं जज्बात लिख रहा हूं,

माफी चाहता हूं जिसको बुरा लगे वो जा सकता है,

मै शायर हूं जज्बात लिख रहा हूं,

माफी चाहता हूं जिसको बुरा लगे वो जा सकता है,

जिसको लगे अच्छा वो सुन लो,

कलम उठा रखी है, सच कहूं तो सच्ची बात लिख रहा हूं,

वो कहती है तुम जैसे दीवानों की लंबी कतार है मेरे पीछे,

मेरे सहर का अंदाज़-ए- बयां कुछ और है,

मैंने कहा जरा ठहरो, तुम्हारी सहर को देखलिया,

अब तुम्हारी औकात लिख रहा हूं।



तू पापा की परी है, तो मां का दुलारा मै भी हूं,

और बिगड़ी तू है, तो आवारा मै भी हूं।



एक चाल तू चल , एक कदम मै भी चलता हूं,

तू गिरता है तो मै संभाल लेता हूं,

मै गिरता हूं तो खुद ही संभल ता हूं।




दोस्तो, अगर आपको मेरे इस ब्लॉग Shayri, के बारे मे कुछ सल्लाह, सुझाव देना है, तो आप कॉमेंट बॉक्स में दे सकते हैं। साथ मे अगर आपको मेरा पोस्ट अच्छी लगा तो कृपया लाइक करें। आगे किस टॉपिक पर पोस्ट लिखूं आप कॉमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।


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