Hindi shayri love
दोस्तो, आज के आशिको के हालात को देखते हुए, Hindi shayri love, मैंने आज लिखी है। इस पोस्ट में आपको बहुत अच्छी शायरी पढ़ने को मिलेंगी। आशा करता हूं, आप पुराने पोस्ट का भी पढ़कर लाभ उठा ही रहे होंगे।
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| Hindi shayri love |
Romantic Shayri In Hindi For GF
ख्वाब आंखों में उतरकर मस्करी करने लगे,
अल्फ़ाज़ किताबों में उतरकर जादू करने लगे,
ख्वाब आंखों में उतरकर मस्करी करने लगे,
अल्फ़ाज़ किताबों में उतरकर जादू करने लगे,
जिनका इश्क हुआ मुकम्मल उनके घर बस गए,
और जिनका इश्क में दिल टूटा वो बेचारे शायरी करने लगे।
उसके बिना ये सास चले, मतलब दिल ना धड़के और सास चले,
उसके बिना ये सास चले, मतलब दिल ना धड़के और सास चले,
वो कहती हैं, मुझे भुला दो शैलेंद्र, मतलब सास ना ले और सांस चले।
मोहब्बत सितामगर है, अजीब है,
ओ मेरा होकर भी मेरा नहीं, अजीब है,
मोहब्बत सितामगर है, अजीब है,
ओ मेरा होकर भी मेरा नहीं, अजीब है,
मै चाहता हूं कि वो हर पल मेरे साथ रहे,
अरे देख ना मेरा ख्वाहिश कितना अजीब है।
खुद की किरदार को कहानी ख़तम करदी,
मैने उसकी हर निशानी ख़तम करदी,
खुद की किरदार को कहानी ख़तम करदी,
मैने उसकी हर निशानी ख़तम करदी,
याद है अबतक गुजरी बचपन की हर यादें,
यार मैंने जुनून के पीछे अपना जवानी ख़तम करदी,
बात इतनी सी था, सबकुछ लूट सकता था,
मैंने हस्कर बात पुरानी ख़तम कर दी,
दिलको भी परिंदा बनाकर कैद करदी तुमने,
मैंने बस आजसे दिलकी निगरानी ख़तम कर दी।
यह इंसान हैं पागल समझता नहीं है,
यह नारी की इज्जत भी करता नहीं है,
यह इंसान हैं पागल समझता नहीं है,
यह नारी की इज्जत भी करता नहीं है,
ये रातें है काली, ये काली है बातें,
उतर आवो चंडी से, है चंडी माते,
पन्ने पन्ने पर लिख दिया गुनहगार मूझे,
इंसाफ करना वो खुदका अदा समझ रही थी,
पन्ने पन्ने पर लिख दिया गुनहगार मूझे,
इंसाफ करना वो खुदका अदा समझ रही थी,
उसके हर कतल, हर गुनाह का हिसाब था मेरे पास,
और वो नादान, खुद को खुदा समझ रही थी।
उसकी महफिल में मेरे इश्क की मजाक उड़ाई गई,
मुझे गुनहगार , और उस लड़की को बेगुनाह बताई गई,
उसकी महफिल में मेरे इश्क की मजाक उड़ाई गई,
मुझे गुनहगार , और उस लड़की को बेगुनाह बताई गई,
मै भी चाहता था कि पेश करू गुनाह उसके यारो,
वो अदालत उसकी थी, मेरा ना सुनी गई , मुझे सिर्फ सजा सुनाई गई।
उसकी यादों में मेरा शहर बस्ता है, हकीकत में उससे कोई राफ्ता नहीं है,
उसकी यादों में मेरा शहर बस्ता है, हकीकत में उससे कोई राफ्ता नहीं है,
वो मंज़िल है मेरा , मै मुसाफिर हूं उसकी,
पाना तो चाहता हूं, अफसोस कि कोई रस्ता नहीं है।
मै आज के जमाना का आशिक हूं,
मजनू की तरह पत्थर नहीं खाऊंगा,
मै आज के जमाना का आशिक हूं,
मजनू की तरह पत्थर नहीं खाऊंगा,
अगर प्यार करना गुनाह है, तो गुनहगार वो भी है,
मै नाम भी लूंगा , पूरा जमाने को बताऊंगा।
छोड़ दो तन्हा मुझे मेरे हाल पर ,
अब ना मुझे जीने कि कोई आश बाकी है,
छोड़ दो तन्हा मुझे मेरे हाल पर ,
अब ना मुझे जीने कि कोई आश बाकी है,
करना है तो इतना सा एहसान करदो,
उस बेवफा से काहदो, मुझमें अभी सांस बाकी है।
जुगनू से खेले हो कभी या यू ही रातें बेकार की है,
जुगनू से खेले हो कभी या यू ही रातें बेकार की है,
कोई बचपन का किस्सा याद है शैलेंद्र,
या जवानी में ही प्यार किया है।
तुझे याद कर करके थक गया हूं मैं, बस तुझे ही मेरा ख्याल नहीं आता ,
तुझे याद कर करके थक गया हूं मैं, बस तुझे ही मेरा ख्याल नहीं आता ,
तेरा दिया हुआ गम अब जख्म बन गया है,
बस अब तुम्हे भूलने का ख्याल नहीं आता।
तेरी बेवफाई ने मेरा नींद छीन ली,
और तू कहती है मै तुझे माफ करदू,
तेरी बेवफाई ने मेरा नींद छीन ली,
और तू कहती है मै तुझे माफ करदू,
इस कदर टूटा हूं की अब जीने को दिल नहीं कहता,
बस तू ही बता किस कदर मै तेरी इंसाफ करदू।
मै शहर भी गया हूं, तेरी शहर वाले भी देखे हैं,
देखे हैं भूखे सुत्ते हुए लोग, और बिकते निवाले भी देखे हैं,
मै शहर भी गया हूं, तेरी शहर वाले भी देखे हैं,
देखे हैं भूखे सुत्ते हुए लोग, और बिकते निवाले भी देखे हैं,
तुम आधा जिस्म ढककर मुझसे हुस्न की बात करती हो,
अरे पागल मै शायर हूं,
मैंने हुस्न भी देखे हैं और हुस्नवाले भी देखे हैं,
तुम खेलते हो जिस्मों से,मोहब्बत के खेल निराले भी देखे हैं,
चेहरे के पीछे चेहरे भी देखे हैं, सफेदी के पीछे दिल काले भी देखे हैं,
लगाकर आग मैंने भी अपने घर में, मैंने भी ऐसे उजाले देखे हैं।

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