Hindi Love Shayri
दोस्तो, आज के आशिको के हालात को देखते हुए, Hindi Love Shayri, मैंने आज लिखी है। इस पोस्ट में आपको बहुत अच्छी शायरी पढ़ने को मिलेंगी। आशा करता हूं, आप पुराने पोस्ट का भी पढ़कर लाभ उठा ही रहे होंगे।
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दफ्तर में मन नहीं लगता घर पर तेरी याद सताती है,
दफ्तर में मन नहीं लगता घर पर तेरी याद सताती है,
सोचता हूं जिदंगी से बिदा लेलू, फिर मां की याद आती है।
कुछ दिनों से काम धंधों पर जाना छोड़ दिया है,
कुछ दिनों से काम धंधों पर जाना छोड़ दिया है,
क्या कहा इश्क , बहुत पहले किया था अब वो भी छोड़ दिया है।
वो दो चोटी में कितनी बच्ची लगती थी,
उसके मुंह से गाली भी तो अच्छी लगती थी,
वो दो चोटी में कितनी बच्ची लगती थी,
उसके मुंह से गाली भी तो अच्छी लगती थी,
मुझे पता था कि वो मुझसे झूठ बोला करती है,
मगर ना जाने क्यू हर बात उसकी सच्ची लगती थी।
तेरे बिना ये दुनिया कितनी बेगानी है,
जब तू ही नहीं तो ये जवानी भी क्या जवानी है,
तेरे बिना ये दुनिया कितनी बेगानी है,
जब तू ही नहीं तो ये जवानी भी क्या जवानी है,
लफ्ज़ खामोश है इसका मतलब मै गूंगा तो नहीं,
समुंदर को छोड़ , देख इन आंखो मे कितना पानी है।
क्यू चली आती हो मिलने बिना चप्पल के,
कहीं तेरे पाव मे काटें चुभ गए तो,
क्यू चली आती हो मिलने बिना चप्पल के,
कहीं तेरे पाव मे काटें चुभ गए तो,
मत नहाने जाया कर तू दरिया में,
कौन जवाब देगा अगर तेरे पीछे दो चार डूब गए तो।
मैंने कई दफा तेरे नाम पे जंग जीता है,
मै खुशियां मानता हूं लोग कहते है बहुत पिता है,
मैंने कई दफा तेरे नाम पे जंग जीता है,
मै खुशियां मानता हूं लोग कहते है बहुत पिता है,
जमाने को क्या पता हम तो अवारे नजर आते हैं।
उन जिस्म की भुखो को सिर्फ जिस्म दिखता है,
ना उसकी उम्र दिखती हैं, ना अपना गैर दिखता है,
उन जिस्म की भुखो को सिर्फ जिस्म दिखता है,
ना उसकी उम्र दिखती हैं, ना अपना गैर दिखता है,
जो कोशिश करी मैंने समाज को आइना दिखाने कि,
लोग कहते हैं यार शैलेंद्र पागल हो गया है नाजने क्या क्या लिखता है।
सुना है हर एक की किस्मत तू लिखता है,
कुछ मे उजाला तो कुछ मे अंधकार लिखता है,
सुना है हर एक की किस्मत तू लिखता है,
कुछ मे उजाला तो कुछ मे अंधकार लिखता है,
तू इतना बेगैरत हो सकता है ये सोचा ना था,
क्यू कि कुछ बेटियो के हिस्सों में तू बलातकार लिखता है।
मै मस्जिद जाया करता था वो मंदिर आया करती थी,
मै जाके कहता अल्लाह हाफ़िज़, वो राधे राधे कहती थी,
कहना तो तुझे बहुत कुछ है पर तेरी सुनकर कोई राजी नहीं,
तू सुना मुझे रात रात भर अपने किस्से , मेरे लिए वो भी काफी नहीं।
काश ये अंधेरा छाया ना होता,
आखो पे पर्दे आया ना होता,
काश ये अंधेरा छाया ना होता,
आखो पे पर्दे आया ना होता,
हम भी लिख रहे होते अपनी ही कामयाबी,
काश तेरा नाम मेरा नाम से आया ना होता।
एक बात अधूरी थी तेरी उसको मै पूरी करदू क्या,
कबसे बैठी है खाली, तुझको मै तुझसा करदू क्या,
एक बात अधूरी थी तेरी उसको मै पूरी करदू क्या,
कबसे बैठी है खाली, तुझको मै तुझसा करदू क्या,
काफी देखे हैं गम तूने, थोड़ी सी खुशियां भर दू क्या।
देख तेरी सादगी अंदाज़ा जरा भी ना था तेरा किरदार इतना संजीदा होगा,
तेरे दिल में लाख परेशानी हो मगर तूने पूरे चेहरे पर सिकन तक ना दिखने दी,
करतब तूने अपना बड़ा खूब निभाया होगा,
तू एक साथ दो किरदार में थी और ये मेहर तेरे दादा की है जो तूने कम उमर मे ये सब कमाया होगा,
मै जानता हूं काफी हद तक लोग तुझे ताने मारते होंगे,
पर तूने अपने काबिलियत से उन सब के मुंह पर ताला लगाया होगा।
तुझमें ऐसा है क्या कि तुझसे मिलने की हसरत करू मैं,
हा सुन चल निकल पहेली फुर्सत में।
ये नखरे ये नाटक जा कही और दिखा ,
और हा,चल अपने बाप को मत सीखा।
डर नहीं लगता है अब इन अंधेरे से साहब ,
अकेला अपनी आगोश में सुला देता है,
डर नहीं लगता है अब इन अंधेरे से साहब ,
अकेला अपनी आगोश में सुला देता है,
डर तो लगता है उन उजाले से साहब,
जो अखो से भी पर्दे हटा देता है।
ये तुम्हारे इश्क की पहेलियां कभी सुलझ ही नहीं पाई,
मै तुमसे दिल लगता रहा , तुम मुझे अपना ही नहीं पाई,
ये तुम्हारे इश्क की पहेलियां कभी सुलझ ही नहीं पाई,
मै तुमसे दिल लगता रहा , तुम मुझे अपना ही नहीं पाई,
तू जुगनुवो की तरह फिर दर ब्दर उजाले के तलाश में,
एक चिराग मुझमें भी था तुम जला ही नहीं पाई।

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